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Monday, May 11, 2026

 जादू नगरी की ओर 


आज पृथ्वी लोक की सुंदरी से मिलने जादू नगरी की चिड़िया आई. धवल सफेद चिड़िया का सिर हरा और पंख गुलाबी थे.  झक सफेद मुँह पर काले काले नैन और काली चोंच. अनोखी थी ये चिड़िया - स्वतंत्र, स्वच्छंद, प्रसन्नचित. 

पृथ्वी लोक की सुंदरी तो अपने रोजमर्रा के कामों में उलझी हुई थी. बिखरे कामों को समेटते समेटते सुंदरी ने अपने घने घुंघराले बालों को भी जूड़े में बांध रखा था. कामों की उलझन में पृथ्वी लोक की सुंदरी को जादू नगरी की चिड़िया के आने का आभास न हुआ. 

जादू नगरी की अनोखी चिड़िया पृथ्वी लोक की सुंदरी के जूड़े पर बैठ गई मानो बंधे जूड़े को खोलने का कह रही हो, मानो स्वच्छंदता का संदेश दे रही हो, मानो बंधनों को तोड़ने का कह रही हो. चिड़िया ने उसके कांधे के तिल की सराहना की. उसके घुंघराले बालों को अपने मखमली पंखों से सहलाया. उसके नीले दुपट्टे को अपनी चोंच से खींचा. उसके कानों में मधुर गीत गुनगुनाए. उसे जादुई दुनिया के बारे में बताया. वहां पहुंचने का रास्ता भी बताया. 

जादू नगरी की चिड़िया की चाहत थी कि पृथ्वी लोक की सुंदरी भी स्वतंत्र, स्वच्छंद, प्रसन्नचित होकर जादू नगरी की सैर पर निकल पड़े. 

मगर पृथ्वी लोक की सुंदरी ठहरी एक मनुष्य. सैकड़ों बंधनों में बंधी, रोजमर्रा के कामों में उलझी एक साधारण मनुष्य. वो न सुन पाई जादू नगरी की चिड़िया का जादुई संदेश. वो न समझ पाई उसकी स्वच्छंदता का मतलब. वो न खोल पाई अपना बंधा  जूड़ा. 

आज जादू नगरी की चिड़िया को अपने देश वापस लौटना पड़ा.

मगर, ये चिड़िया फिर आएगी. वो आती रहेगी. वो पृथ्वी लोक की सुंदरी को जादुई नगरी का रास्ता बताती रहेगी.

एक दिन ऐसा आएगा जब पृथ्वी लोक की सुंदरी को जादू नगरी की चिड़िया की बात समझ आ जाएगी.

उस दिन सुंदरी अपना बंधा जूड़ा खोल देगी. उस दिन वो स्वच्छंद हो जाएगी. वो भी उड़ना सीख लेगी. 

उस दिन जादू नगरी की चिड़िया अपना गुलाबी पंख फैला कर उड़ पड़ेगी और पृथ्वी लोक की सुंदरी भी अपना नीला दुपट्टा लहरा कर उड़ पड़ेगी जादू नगरी की ओर...


🖊️ प्राची 

2 comments:

  1. इंतज़ार है उस स्वतंत्र सुबह का जब पृथ्वी लोक की जादुई चिड़िया जादू नगरी की सुन्दरी के साथ उड़ चलेगी।

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  2. Wah din jarur aayga dost 🕊🕊😊💖

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