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अलविदा 2025 ईश्वर की कृपा से एक और साल सही सलामत गुजर गया. कुछ सीख, कुछ खुशियां और नई आशाएं देकर गया ये साल 2025. दिसंबर के कोहरे भरे दिन और...
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राम ज्यादा आम खाता है क्या दीदी ? - यह मेरी अबतक की ज़िंदगी में पूछा गया सबसे तार्किक प्रश्न था. सवाल पूछा था उस छोटी सी बच्ची ने, जो...
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सोलह संस्कारों में जिस संस्कार को सर्वाधिक महत्व मिलते मैंने देखा है, वो है विवाह संस्कार. यहाँ सर्वाधिक महत्व से मेरा तात्पर्य बेवजह की ...
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आज़ादी मुबारक कुछ परंपराएं बहुत खूबसूरत होती हैं. इन्हीं खूबसूरत परंपराओं में से एक है स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का रा...
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शहतूत बचपन में खाए गए इस भूले बिसरे फल पर अचानक निगाह पड़ी... कुछ सेकंड्स लगे याद आने में कि ये तो शहतूत है. ये वही है जिसे हम तूत कहा करते...
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रविवार की सुबह ब्रह्म बेला में ईश्वर की नेमतें बरसी. बारिश की बूंदों के साथ तेज हवाएं भी चली. इस प्राकृतिक कूलर की ठंडक का वाकई कोई जोड़ न...
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