आभार- विविध भारती के नाम
आज शाम को दीदी ने याद दिलाया कि अरे आज 3 अक्टूबर है, विविध भारती का स्थापना दिवस.
सुनते ही विविध स्मृतियाँ ताजी हो गईं. “ध्वनि तरंगों की ताल पर आप हैं विविध भारती के संग” युनुस खान की आवाज कानों में गूँज गई.
मैंने दीदी से कहने की कोशिश की, “युनुस खान…” बात अधूरी रह गई. दीदी बोल पड़ी, “अरे, उन्होंने फेसबुक पर बड़ा सुंदर पोस्ट लिखा है. रुको, तुमसे शेयर कर रहे हैं”.
मेरे मन के स्मृतियों के घोड़े भी दौड़ लगा कर मेरे बचपन में पहुंच गए. टीवी देखने की इजाजत थी नहीं हमें, पर रेडियो सुनने की पूरी छूट थी. बाबा को समाचार जानने का बड़ा शौक था तो बीबीसी सुनते रहते थे जो मेरी समझ में बिल्कुल नहीं आता था.
मम्मी सुनती थीं विविध भारती. आज भी सुनती हैं. टीवी पर कोई कार्यक्रम देखते हुए भी रेडियो बंद नहीं होता उनका.
बचपन में हम तीनों भाई बहनों को बहुत सी पत्रिकाएँ मिलती थीं पढ़ने को, खेलने को मिलता थी बड़ी सी खुली जगह और दुनिया के विविध आयामों को बहुत मनोरंजक तरीके से जानने को मिलता था विविध भारती के माध्यम से.
कितनी मधुर स्मृतियाँ हैं विविध भारती की.
युनुस खान, ममता शर्मा, निम्मी मिश्रा, कमल शर्मा की मधुरतम आवाजों में जो बातें सुनी आजतक याद है. ‘हवा महल’, ‘बाइस्कोप की बातें’, ‘हेलो फरमाइश’, ‘जयमाला’ इत्यादि कितने कार्यक्रम हैं जिन्होंने मेरी रचनात्मकता को संवारा है. मुझे लगता है आज जो मेरे लिखे नाटकों को इतनी प्रशंसा मिलती है; उस सटीक लेखन का श्रेय हवा महल को जाता है. रोज रात ‘हवा महल’ सुन कर सोती थी. चूंकि रेडियो पर सिर्फ आवाज सुनाई देती है, पात्रों को आँखे बंद कर के आवाज के माध्यम से हीं महसूस करने की कोशिश करती थी. आज जो कल्पनाशक्ति मेरे पास है, उसका बहुत बड़ा श्रेय विविध भारती को जाता है.
संगीत की जो समझ है, वो भी विविध भारती की देन है. वहीं से पता चला था कि गायक, संगीतकार, गीतकार, फिल्मकार, कैमरामैन, निर्देशक इत्यादि अलग अलग लोग होते हैं. सबकुछ हीरो हीरोइन नहीं होते.
ख़य्याम का संगीत पहली बार विविध भारती पर ही सुना था. ‘बहारों मेरा जीवन भी सँवारो’ सुनकर जो जादुई अनुभव हुआ था, उसकी ताजगी आजतक बरकरार है.
‘हेलो फरमाइश’ पर जो लोग फोन करते थे, उनकी बातें सुनकर समझ आया कि देश के विभिन्न हिस्सों में अलग अलग लहजों में बात की जाती है. वही सीख थी जो बाद में घर से दूर अलग अलग स्थानों पर अलग अलग बोलियां बोलने वाले लोगों से सहज ही घुल मिल गई. विविध संस्कृतियों की ‘सहज स्वीकृति’ की अनायास सीख दी है मुझे विविध भारती ने.
इस ग्रह पर ‘झुमरी तलैया’ नाम की कोई जगह है, ये भी विविध भारती पर भेजे गए फरमाइशी खतों से पता चला. मेरी बड़ी इच्छा है जीवन में कभी किसी झुमरी तलैया वासी से मुलाकात हो.
मैंने फिल्में भी बहुत बाद में देखनी शुरू की. बीएचयू में नामांकन के समय मेरे द्वारा देखी गई कुल फिल्मों का आंकड़ा था - तीन.
लेकिन, इतनी कम फिल्में देखने के बावजूद आज भी फिल्मों से लेकर फिल्ममेकिंग की जो समझ है, वो बाइस्कोप की बातें सुनकर विकसित हुई है.
और हाँ, बीबीसी पर प्रसारित समाचार भले ही मेरी समझ में न आता हो, विविध भारती पर रात 8:45 पर आती पंद्रह मिनट की खबर खूब समझ आती थी. वो सुनकर मैं कक्षा में स्मार्ट बनी घूमती थी और शिक्षकों- शिक्षिकाओं से प्रशंसा बटोरती थी. सहपाठियों में भी भौकाल था, “प्राची का करेंट अफेयर्स अच्छा है” 😂
विविध भारती के विविध आयामों से अलंकृत हुआ है मेरा जीवन.
आभार
आभार
आभार
सदैव फूले फले विविध भारती 🌺🌹
🖊️ Prachi

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